कविता से
नीचे लिखी पंक्तियाँ पढ़कर उत्तर दो।
“नया संसार बसाएँगे, नया इंसान बनाएँगे।”
तुम्हारे विचार से नया संसार बसाने और नया इंसान
बनाने की ज़रूरत है या नहीं? कारण भी बताओ।
ऊपर लिखी पंक्ति के आधार पर हमारे विचार से नया संसार बसाने और नया इंसान बनाने की जरूरत ही नहीं है। संसार इंसानों से बनता है। ऐसे में सिर्फ बदलाव की जरूरत इंसानों में रह जाती है। अगर इंसान खुद में बदलाव पैदा कर ले तो संसार अपने आप नया हो जाएगा। यदि हम नया संसार बनाते हैं या नया इंसान बनाते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित नहीं होता कि उसमें समस्याएं और असमानाताएँ नहीं आएंगी। इसलिए इस बात को भुलाकर हमें स्वयं में बदलाव करने की आवश्यकता है।
कविता से
नीचे लिखी पंक्तियाँ पढ़कर उत्तर दो।
“रोज त्योहार मनाएँगे।”
तुम्हारे विचार से क्या रोज़ त्योहार मनाना उचित है? क्यों?
हमारे विचार से रोजाना त्योहार मनाना उचित नहीं है। यदि हम रोजाना किसी उत्सव का जश्न मनाना शुरू कर दें तो जल्दी ही उत्सवों का महत्व कम हो जाएगा। दूसरा, इंसान अपने सभी कामों को छोड़कर इन्हीं त्योहारों में उलझा रहेगा। इंसानों का जेबखर्च बढ़ जाएगा और घर में आर्थिक तंगी के हालात पैदा होने लगेंगे। जिन त्योहारों की हमें प्रतीक्षा रहती है उनमें रस खत्म हो जाएगा और वे बेहद साधारण लगने लगेंगे।
कविता से
नीचे लिखी पंक्तियाँ पढ़कर उत्तर दो।
“सौ सौ स्वर्ग उतर आएँगे, सूरज सोना बरसाएँगे।
दूध पूत के लिए बदल देंगे तारों की चाल”
क्या ऊपर लिखी बातें संभव हो सकती हैं? कारण भी पता करो?
हां, कवि की ये सभी बातें निश्चित तौर पर संभव हो सकती हैं। यदि मनुष्य मेहनत करे तो वो मेहनत से ही धरती पर सैकड़ों स्वर्ग उतार सकता है। कवि कह रहा है कि यदि सभी मनुष्य एकसाथ मिलकर मेहनत करें तो धरती का कोना-कोना लहलहा उठेगा। उसकी सुंदरता का नजारा होगा कि चारों और स्वर्ग उतर आए हों। इस तरह हमारी मेहनत आने वाली पीढ़ियों के भाग्य को बदलकर रख देगी और वे हमेशा फलते-फूलते हुए इस पृथ्वी पर रहेगें।
कविता से
नीचे लिखी पंक्तियाँ पढ़कर उत्तर दो।
कवि ‘हम धरती के लाल’ ही क्यों कहना चाहते हैं?
कवि ने अपनी रचना में हमें हम धरती के लाल इसलिए कहा है क्योंकि वह मनुष्य के संबंध को धरती के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है| जिस तरह से बच्चों का कर्तव्य अपने माता-पिता की सेवा करना होता है। ठीक उसी तरह जब हम धरती को माँ मानने लगते हैं तो हम उसके साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। इसी संबंध के चलते हमारे धरती मां के प्रति कुछ कर्तव्य भी होते हैं, जिसे कवि याद दिलाने का प्रयास कर रहा है।
वाक्य बनाओ
‘सूख-स्वप्नों के स्वर गूँजेंगे।’
इसमें ‘स’ अक्षर बार-बार आया है।
तुम भी नीचे लिखे वर्णों से वाक्य बनाओ। ध्यान रखो कि उस वर्ण से शुरू होने वाले तीन शब्द तुम्हारे वाक्य में हो।
क) क....................
ख) ख...................
ग) द.....................
क- कागज की कश्ती का कोई किनारा नहीं होता।
त- तीन तमगे तानकर चलते हमारे अशोक जी।
द- दान देना दानवीर कर्ण की आदत थी|
शब्द-सज्जा
‘हम नया भूगोल बनाएँगे।’
ऊपर लिखी पंक्ति में ‘भूगोल’ शब्द की जगह और कौन-कौन से शब्द आ सकते हैं? नीचे दिए गए बॉक्स में से छाँटो और कुछ शब्द स्वयं सोचकर लिखो।
संसार, कल्पना, इंसान, पौधा, चेतना, जमाना, दुनिया, इतिहास
उत्तर- संसार, दुनिया, इतिहास, विश्व, देश
शब्द-सज्जा
नीचे लिखे शब्दों को तुम्हारे घर की भाषा में क्या कहते हैं?
सोचो और बताओ
कवि एक नया संसार बसाना चाहता है जहाँ मानव की मेहनत पूजी जाए, जहाँ जनता में एकता हो, जहाँ सब समान हों, जहां सभी सुखी हों। तुम्हें अपने संसार में ऊपर लिखी बातें नज़र आती हैं या नहीं? इन बातों के होने या न होने का क्या कारण है?
नहीं, हमारे संसार में ऊपर लिखीं बातें पूरी तरह से नजर नहीं आती। बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो मेहनत करते हैं और उसके पश्चात भी अन्यों से बहुत पीछे हैं। अपने आस-पास मुझे रिक्शे वालों की हालत देख दुख होता है। वो दिन भर इतनी मेहनत करते हैं, बावजूद उसके उन्हें अपना जीवन जीने के लिए तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यहां धनवान और घनवान हो रहा है और गरीब और ज्यादा गरीब। इसके अलावा यहां सभी को एक समान बिल्कुल नहीं माना जाता। जाति भेद को लेकर सब आपस में लड़ रहे हैं। इसलिए यहां कोई सुखी नहीं है।
सोचो और बताओ
तुम भी अपने संसार के बारे में कल्पनाएँ ज़रूर करते होंगे। अपने सपनों की दुनिया के बारे में बताओ।
हाँ मैं भी अपने सपनों की दुनिया की कल्पना करता हूं, लेकिन मेरी सपनों की दुनिया बहुत अलग है। मैं एक ऐसे संसार की कल्पना करता हूं जहां हर इंसान को बराबर का दर्जा दिया जाए। एक ऐसा संसार जहां कोई अमीर गरीब न हो। जहां कोई भूखा न रहे। हर तरफ पेड़ पौधे हो। उस दुनिया में प्रदुषण का नामों निशान न हो। बड़ी बड़ी इमारतों की जगह कच्चे घर हो। मोटर साइकिल, गाड़ियों की जगह साइकल की सवारी हो। सभी लोग मिल जुलकर प्यार से एक साथ रहते हो।
कैसे?
बताओ तुम ये काम कैसे करोगे? शिक्षक से भी सहायता लो।
नया इंसान बनाना
अपने अंदर बुरी आदतों को दूर कर जो भी कमियां हो उन पर काम करके एक ऐसा इंसान बनेंगे, जो दुनिया के लिए मिसाल होगा। ऐसा व्यक्ति न सिर्फ व्यवहारिक रूप से बेहतर होगा, बल्कि वह समाज के कल्याण में भी पूर्ण रूप से योगदान करने में अग्रसर होगा। व्यक्ति के व्यवहार को निखारने और उसे जागरुक बनाने शिक्षा का सबसे अहम किरदार होता है।
कैसे?
बताओ तुम ये काम कैसे करोगे? शिक्षक से भी सहायता लो।
समय को राह दिखाना
हम समय को लेकर एक टाइम टेबल तैयार करेंगे। इसके अनुसार हम अपने हर काम को निर्धारित समय पर पूरा भी करेंगे। जो समय बचेगा उसका भी सही से उपयोग करेंगे। इससे न सिर्फ हम अपने काम को सही ढंग से व्यवस्थित कर पाएंगे, बल्कि समय का सदुपयोग भी कर कर सकेंगे। आने वाले समय की पहले से योजना बनाकर रखने से समय को राह दिखा पाएंगे।
कैसे?
बताओ तुम ये काम कैसे करोगे? शिक्षक से भी सहायता लो।
जनता को एक करना
लोगों के बीच जो भी कलह है उसे खत्म कर हम उन्हें प्रेम और भाईचारे का पाठ पढ़ाएंगे। इसके साथ ही उन्हें मिल-जुलकर रहने के फायदे बताएंगे और इस तरह हम उन्हें एक कर सकते हैं। जनता को एकमत करने से हम समाज में पनप रही कुरीतियों के खिलाफ मजबूत निर्णय ले सकेंगे। जनता को एक कर हम अपने सामाजिक उद्देश्यों की प्राप्ति कर सकते हैं।
कैसे?
बताओ तुम ये काम कैसे करोगे? शिक्षक से भी सहायता लो।
तारों की चाल बदल देना
उत्तर- हम हर काम को इतनी मेहनत से करें की भाग्य भी अपने हाथों पर चलने के लिए मजबूर हो जाए। परिश्रम करके हम अपने भाग्य को बदल सकते हैं। इंसान के सामने भले ही कितनी मुश्किलें क्यों न हों, लेकिन कठोर परिश्रम से हम लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं। इससे इंसान खुद अपने बुरे दिनों को अच्छे दिनों में तब्दील कर सकता है।
कैसे?
बताओ तुम ये काम कैसे करोगे? शिक्षक से भी सहायता लो।
नया भूगोल बनाना
लोगों के बीच के कलह को दूर कर उन्हें एकजुट कर एक नया भूगोल बनाएंगे, जो हमारे अनुसार होगा। नया भूगोल बनाने से अभिप्राय लोगों को बदलकर एक ऐसे समाज की स्थापना करना है जहां सब जागरुक हों, शिक्षित हों और निष्पक्ष हों। नए भूगोल में सभी को समान अधिकार प्राप्त होंगे और कोई भी उनसे वंचित नहीं रहेगा।
यह भी करो
ऐसी ही एक और कविता खोजकर अपनी कॉपी में लिखो। तुम स्यवं भी कविता की रचना कर सकते हो।
पहले इंसान बनो (कविता)
जितने ऊपर उठ जाओ, एक लायक सन्तान बनो
सब कुछ बनो मुबारक है, पर पहले इंसान बनो ।।
प्रेम भाव को अपनाकर, सबका तुम सम्मान करो
दुराचार को धता बताकर, सदाचार पर गौर करो ।।
दीन दुखी की सेवा कर, तुम समाज की आन बनो
भूखों की तुम क्षुधा मिटाकर,परिवारों की शान बनो।
माँ बाप को शीश झुकाओ, गुरुओं का सम्मान बनो
सब कुछ बनो मुबारक है, पर पहले इंसान बनो ।।
विनम्रता को अपनाओ, वाणी में मधु संवाद भरो
नारी का सम्मान करो, एक योग्य अपवाद बनो ।।
भटकों को राह दिखाकर,लोगों का विश्वास बनो
कर्तव्यों का निर्वाहन कर, तुम कुटुंब की जान बनो।।
चाहे अधिकारी बन जाओ, चाहे तुम इतिहास गढ़ो
सब कुछ बनो मुबारक है, पर पहले इंसान बनो